मुर्गों की इस नस्ल ने
कभी उड़ने की कोशिश नहीं की.
वे भूल चुके थे के
पंख उड़ने के भी काम आते हैं.
इन्सानी दिमाग ने इसकी टोह ली
तेल अल्वी की प्रयोगशाला में
पंख विहीन नयी मुर्गे की एक नस्ल
इज़ाद की .
इन्सान को भी तो सिर्फ गोश्त चाहिए.
सो इस नस्ल को इज़ाद किया.
हमारे देश की सियासी प्रयोगशाला में भी
एक कौम ईजाद हो चुकी है
सत्तर साल पहले- - - - - -
कभी उड़ने की कोशिश नहीं की.
वे भूल चुके थे के
पंख उड़ने के भी काम आते हैं.
इन्सानी दिमाग ने इसकी टोह ली
तेल अल्वी की प्रयोगशाला में
पंख विहीन नयी मुर्गे की एक नस्ल
इज़ाद की .
इन्सान को भी तो सिर्फ गोश्त चाहिए.
सो इस नस्ल को इज़ाद किया.
हमारे देश की सियासी प्रयोगशाला में भी
एक कौम ईजाद हो चुकी है
सत्तर साल पहले- - - - - -