Wednesday, December 13, 2017

नंगा मुर्गा

मुर्गों की इस नस्ल ने
 कभी उड़ने की कोशिश नहीं की.
वे भूल चुके थे के
पंख उड़ने के भी काम आते हैं.
इन्सानी दिमाग ने इसकी टोह ली
तेल अल्वी की प्रयोगशाला में
पंख विहीन नयी मुर्गे की एक नस्ल
इज़ाद की .
इन्सान को भी तो सिर्फ गोश्त चाहिए.
सो इस नस्ल को इज़ाद किया.
हमारे देश की सियासी प्रयोगशाला में भी
एक कौम ईजाद हो चुकी है
 सत्तर साल पहले- - - - - - 

Monday, December 11, 2017

खौफ

दहशत में हूँ कि
मेरे पड़ोस में रहने वाला कौन हैं?
जो
धर्म - जाति के नाम पर मुझे खत्म करने पर आमदा है.
अमीरी - गरीबी की शह पर मारने को आतुर है.
शहरी - देहात की बिना पर बेदखल करने को बेसब्र है.
स्त्री - पुरुष के भेद पर
न्याय - अन्याय के नाम पर मुझे लूटने को बेकरार है
पढ़े लिखे - अनपढ़ की शह पर
मुझ पर जुल्म ढाने को तैयार है.
मै अपने आप को चारों ओर से घिरा पाता हूँ
जैसे अपने आप में राजसमंद हूँ. 

Tuesday, November 22, 2016

ज्ञान

                                             ज्ञान 

झोपड़ी  में बैठ 
जाना  आक्रोश क्या है ?
थकी बूढी आँखों  को देख 
जाना उम्मीद की हद(सीमा )क्या है?
बढ़ते नन्हे क़दमों से 
जाना प्रेरणा क्या है ?
जमीन पर बैठ कर जाना थकान क्या है। 
उठ कर जाना 
मेरी कूवत(सामर्थ्य)  क्या है ?


धरा पर चढे पैर। 
पैरों पर चढ़ा धड़। 
धड़ पर चढ़ा सर। 
नभ चढ़ा सर पर। 

बैठा भी रहा हूँ मैं

                                         बैठा भी रहा हूँ  मैं 

बैठा भी रहा हूँ मैं  
जैसे -
अपनों में अजनबी की तरह ,
फूलों में महक की तरह ,
हवा में खुशबू  की तरह,
बेवकूफों में बुद्धिजीवी की तरह ,
आसमान में बादल  की तरह ,
भाषण में नींद की तरह ,
रंगों में लाल की तरह ,
 बारूद  में आग की तरह। 

Saturday, November 5, 2016

क्रांति

                                                  क्रांति 



उनका 
चेहरा क्या ?
गरीबी की
 जियोग्राफी । 

गरम 
तपती
 चिलचिलाती
 धूप में 
लाल-लाल झंडियां लिए 
अक्सर 
उन्हें ऊँचे-ऊँचे 
रंग-बिरंगे
 झंडों की छाँव में
 ठहरे 
सुस्ताते 
देखा। 

                                           झंडा 


                                              





भूखे पेट 
नंगे बदन 
पिचके चेहरे 
हाथों में उनके 
लाल
पीले  
हरे 
नीले 
केसरिया 
सफ़ेद 
झंडे  
अफ़सोस नहीं है 
झंडों के चेहरे नंगे 
नंगे है वह चेहरे 
जिनके कंधों से  ऊँचे 
हमेशा रहते ये  झंडे  .