Monday, December 11, 2017

खौफ

दहशत में हूँ कि
मेरे पड़ोस में रहने वाला कौन हैं?
जो
धर्म - जाति के नाम पर मुझे खत्म करने पर आमदा है.
अमीरी - गरीबी की शह पर मारने को आतुर है.
शहरी - देहात की बिना पर बेदखल करने को बेसब्र है.
स्त्री - पुरुष के भेद पर
न्याय - अन्याय के नाम पर मुझे लूटने को बेकरार है
पढ़े लिखे - अनपढ़ की शह पर
मुझ पर जुल्म ढाने को तैयार है.
मै अपने आप को चारों ओर से घिरा पाता हूँ
जैसे अपने आप में राजसमंद हूँ. 

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