दहशत में हूँ कि
मेरे पड़ोस में रहने वाला कौन हैं?
जो
धर्म - जाति के नाम पर मुझे खत्म करने पर आमदा है.
अमीरी - गरीबी की शह पर मारने को आतुर है.
शहरी - देहात की बिना पर बेदखल करने को बेसब्र है.
स्त्री - पुरुष के भेद पर
न्याय - अन्याय के नाम पर मुझे लूटने को बेकरार है
पढ़े लिखे - अनपढ़ की शह पर
मुझ पर जुल्म ढाने को तैयार है.
मै अपने आप को चारों ओर से घिरा पाता हूँ
जैसे अपने आप में राजसमंद हूँ.
मेरे पड़ोस में रहने वाला कौन हैं?
जो
धर्म - जाति के नाम पर मुझे खत्म करने पर आमदा है.
अमीरी - गरीबी की शह पर मारने को आतुर है.
शहरी - देहात की बिना पर बेदखल करने को बेसब्र है.
स्त्री - पुरुष के भेद पर
न्याय - अन्याय के नाम पर मुझे लूटने को बेकरार है
पढ़े लिखे - अनपढ़ की शह पर
मुझ पर जुल्म ढाने को तैयार है.
मै अपने आप को चारों ओर से घिरा पाता हूँ
जैसे अपने आप में राजसमंद हूँ.
👌
ReplyDeleteगहरी बात!
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