दरबे में हाथ ने पकड़ा उस एक को।
हल -चल मची कुछ क्षण के लिए।
फिर चली छुरी उस एक पर।
आर्त स्वर में सहमे सभी।
चुप्पी सधी कुछ क्षण के लिए।
फिर लग गए सब दाना चुगने।
राजेन्द्र कुमार
हल -चल मची कुछ क्षण के लिए।
फिर चली छुरी उस एक पर।
आर्त स्वर में सहमे सभी।
चुप्पी सधी कुछ क्षण के लिए।
फिर लग गए सब दाना चुगने।
राजेन्द्र कुमार
vry nice sir
ReplyDeletetruuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu
This poem was written when i was in P.G 2nd semester......
ReplyDeleteBahut badia sir
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