ट्रामों बसों के शोर में खोई मेरी आवाज ,
कार्बन मोनो-ऑक्सइड में
घुली मेरी सांसे ,
हेड लाईट से बुझती मेरी आँखें .
कंक्रीट के जंगल में खोया
मैं अब महज एक इंसान नहीं रहा.
राजेन्द्र कुमार
कार्बन मोनो-ऑक्सइड में
घुली मेरी सांसे ,
हेड लाईट से बुझती मेरी आँखें .
कंक्रीट के जंगल में खोया
मैं अब महज एक इंसान नहीं रहा.
राजेन्द्र कुमार
to kya hogye sir aap???????????????
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