एक अजीब गंध
पसीने से सरोबार
हाल के कोने कोने में
रची बसी
छत से डैनों जैसे
पंखों की किरकिराटी
आवाज़ ,
हवा में तैरती
इत्र की महक कभी कभार।
रौशनी की दमक में
आस से खींचे चले आते
कीट पतंगे।
गोया ज़िन्दगी की
आखरी छटपटाहट ,
बेचैन गश्त
कुर्सी के आगे
खड़े बेरौनक सहमे चेहरे।
पर आस कीट पतंगों सी,
मैं हर चेहरा सिर्फ पढता रहा.
छिपकली बार -बार झांकती रही,
कीटों पर झपट कर बार- बार खाती रही
आहाट पर
दुबक जाती
नेताओं के तस्वीरों के पीछे।
मैं सिर्फ चेहरे पढता रहा। …
पसीने से सरोबार
हाल के कोने कोने में
रची बसी
छत से डैनों जैसे
पंखों की किरकिराटी
आवाज़ ,
हवा में तैरती
इत्र की महक कभी कभार।
रौशनी की दमक में
आस से खींचे चले आते
कीट पतंगे।
गोया ज़िन्दगी की
आखरी छटपटाहट ,
बेचैन गश्त
कुर्सी के आगे
खड़े बेरौनक सहमे चेहरे।
पर आस कीट पतंगों सी,
मैं हर चेहरा सिर्फ पढता रहा.
छिपकली बार -बार झांकती रही,
कीटों पर झपट कर बार- बार खाती रही
आहाट पर
दुबक जाती
नेताओं के तस्वीरों के पीछे।
मैं सिर्फ चेहरे पढता रहा। …
asli chipkaliya to I P S oficers hi hain
ReplyDeleteThis poem unmasks the the ugly face of Indian politicians. The images used are powerful and thought provoking.. all the best friend keep going
ReplyDeleteThis is the truth still the insects believed in good and hope to live happy and enjoy its life in the light. But the lizards are became cruel and forgot as it is also a creature. So it is the time to make lizard learn humanities to live with humanity.
ReplyDeleteWah Wah
ReplyDelete