दो एक शब्द .
कविता की कतार में खड़े .
भावों को तहजीब देने का दावा
कागज़ पर स्याह से खिंची चंद लकीरें .
आदमी के वजूद से जुडी कुछ बातें.
कविता सिर्फ भावों का ?
अनुभवों का लेखा जोखा है ?
आंतर में भटके आदमी की सर्द भरी चीख है ?
कविता न शब्दों कि तड़क,
भावों कि भड़क है .
बिते हुए कल और आने वाले कल के साथ,
इंसान के उम्मीदी और नाउम्मीदी का दस्तावेज है.
राजेंद्र कुमार
bhut bdhiya
ReplyDeletekvita ki ek nyi pribhasha...............