समय गंध
जहाँ मैं खड़ा हूँ
वहां समय के गंध की संधास भरी पड़ी है।
क्या बताऊँ के ताजा समय कैसा है ?
ताजे जिस्म पर सडा दिमाग ,
सड़ी सोंच से सरोबार हर आदमी,
इस समय को गंधाता है।
सड़ी मुस्कान से माहौल को खुशनुमा बनाने की नाकाम कोशिशों के बावजूद ,
हर चेहरे दूसरे हर चेहरे की नज़रों को तौलते नज़र आते है।
समय के दुर्गन्ध।
विकृत समय की स्थिति।
खंडहर सा बिखरा
एक सड़ा समाज समय।
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