बुद्धिजीवी कुकुरमुत्ता
उग
आया है
यहाँ
वहाँ
खेत
खलिहान
चौपाल
परिचर्चाओं
में।
हाथ लगते ही
उसका रंग उड़ने लगा
चिपचिपाती सीलन सी
बदबू हाट में पसेर गया
उठा उसे फ़ेंक दिया
फिर उसी
कचरे के ढेर में।
उग
आया है
यहाँ
वहाँ
खेत
खलिहान
चौपाल
परिचर्चाओं
में।
हाथ लगते ही
उसका रंग उड़ने लगा
चिपचिपाती सीलन सी
बदबू हाट में पसेर गया
उठा उसे फ़ेंक दिया
फिर उसी
कचरे के ढेर में।
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